
Mokshada Eakadashi Kab Hai🌼 मोक्षदा एकादशी: पितरों की मुक्ति और श्रीकृष्ण कृपा का अनमोल अवसर, जानें पूरा पंचांग, भद्रा काल, पूजा विधि और व्रत पारण का शुभ समय 🌼
क्या आपने कभी महसूस किया है…
कि आपके जीवन में कुछ न कुछ ऐसा अटक जाता है, जो लाख कोशिशों के बाद भी ठीक नहीं होता?
कभी धन रुक जाता है…कभी बिना कारण बीमारी घेर लेती है…कभी घर में शांति खो जाती है…और कभी अचानक ऐसे संकट आ जाते हैं जिनका कोई तर्क ही नहीं मिलता!
क्या सच में यह सिर्फ संयोग है?
या कोई अदृश्य शक्ति आपको संकेत दे रही है…कि आपके पितर अभी भी संतुष्ट नहीं हुए हैं…
कि उनकी आत्माएं आज भी आपकी ओर देख रही हैं।कि उन्हें अभी भी आपकी एक छोटी-सी कृपा की प्रतीक्षा है?
और क्या हो अगर मैं कहूँ—
Mokshada Eakadashi Kab Hai
कि **आज** उनके लिए सबसे बड़ा अवसर खड़ा है…
ऐसा अवसर जो साल में केवल **एक बार** आता है…
जब एक साधारण मनुष्य भी अपने पितरों को
नरक से उठाकर **बैकुंठ लोक** तक पहुंचा सकता है।हाँ!
आज वही दिव्य तिथि है— **मोक्षदा एकादशी**।
वही दिन, जब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र में
अर्जुन को *गीता का उपदेश* दिया था।
वही दिन, जब तिल, जल और श्रद्धा से किया गया *एक तर्पण*
पितरों के लिए मोक्ष के द्वार खोल देता है।
लेकिन इस बार मामला गंभीर है…
क्योंकि इस एकादशी पर **भद्रा** लग रही है।
अगर भद्रा के दौरान आपने पूजा या तर्पण में गलती कर दी
तो व्रत का पूरा फल नष्ट हो सकता है।
जल कब चढ़ाएं?
पूजा किस मुहूर्त में करें?
व्रत का पारण कब?
Mokshada Eakadashi Kab Hai
हर चरण में एक छोटी गलती… और पूरा पुण्य शून्य।
अगर आप अपने पितरों की मुक्ति चाहते हैं…
अगर आप अपने जीवन से बाधा, रुकावट और दुर्भाग्य हटाना चाहते हैं…
और अगर आप श्रीकृष्ण की कृपा अपने घर-परिवार में बुलाना चाहते हैं…
तो इस पोस्ट को अभी, इसी क्षण से ध्यान से सुनिए…
क्योंकि आज जो ज्ञान आप प्राप्त करने वाले हैं,
वह आपके पितरों की मुक्ति…
और आपके जीवन की दिशा—
**दोनों बदल देगा
।**
✨ *हरे कृष्णा — ओम नमो भगवते वासुदेवाय* ✨
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पावन तिथि मोक्षदा एकादशी इस वर्ष अनेक दिव्य संयोगों के साथ उपस्थित हो रही है। मान्यता है कि इस दिन किया गया पितृ तर्पण पितरों को नरक से उठाकर सीधे बैकुंठ लोक तक पहुंचाने की शक्ति रखता है। जीवन में कितना ही पुण्य क्यों न कर लिया जाए, यदि पितरों को शांति न मिले तो घर में स्थिर सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि नहीं रहती। यही कारण है कि इस एकादशी को “मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी” कहा गया है।
✨ गीता जयंती का भी दिव्य योग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था। इसलिए यह तिथि केवल मोक्षदा एकादशी ही नहीं, बल्कि गीता जयंती भी है। इस दिन व्रत और पूजा करने से भक्तों तथा उनके पितरों दोनों को मोक्ष का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
🌙 तिथि और समय
- एकादशी प्रारंभ: 30 नवंबर, रविवार रात 9:30 बजे
- एकादशी समाप्त: 1 दिसंबर, सोमवार शाम 7:01 बजे
- व्रत रखा जाएगा: 1 दिसंबर, सोमवार
🕉 भद्रा का प्रभाव
इस बार मोक्षता एकादशी पर भद्रा का वास मृत्युलोक में रहेगा।
- भद्रा आरंभ: 1 दिसंबर सुबह 8:30 बजे
- भद्रा समाप्त: 1 दिसंबर शाम 7:01 बजे
शुभ कार्य भद्रा काल में वर्जित माने गए हैं। इसलिए पूजा, तर्पण, पाठ आदि भद्रा प्रारंभ होने से पहले या इसके समाप्त होने के बाद करना उत्तम रहेगा।
🌿 तुलसी पूजन से जुड़े नियम
रविवार को तुलसी जी में जल अर्पित करना वर्जित है। इसलिए इस बार
- तुलसी जल अर्पण: शनिवार को कर लें
- तुलसी पत्ते तोड़ना: शनिवार को ही
(अगर पत्ते नहीं तोड़े तो गिरे हुए पत्तों को जल से धोकर भी भोग में अर्पित किया जा सकता है।)
🌄 पूजा के शुभ मुहूर्त – 1 दिसंबर (सोमवार)
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:20 – 6:08
- प्रातः पूजा: 5:35 – 6:56
- सूर्योदय: 6:55 AM
- शाम की पूजा: 5:24 – 6:45 PM
राहुकाल: सुबह 7:30 – 9:00 (दान-पुण्य के लिए उत्तम)
🙏 द्वादशी तिथि और व्रत पारण – 2 दिसंबर (मंगलवार)
- द्वादशी प्रारंभ: 1 दिसंबर, शाम 7:02
- द्वादशी समाप्त: 2 दिसंबर, दोपहर 3:57
- हरिवासर समाप्त: 1 दिसंबर रात 12:00 बजे
- व्रत पारण का शुभ मुहूर्त:
👉 2 दिसंबर सुबह 6:57 – 9:03
🕯 व्रत विधि और खास नियम
- दशमी तिथि तक सूर्यास्त से पहले सात्विक भोजन कर लें।
- एकादशी के दिन प्रातः स्नान करके श्रीकृष्ण एवं श्रीविष्णु की पूजा करें।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “हरे कृष्ण” मंत्र का जाप करें।
- चूंकि यह गीता जयंती भी है, इसलिए श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ अवश्य करें।
- रात में भजन, कीर्तन और जागरण शुभ माना जाता है।
- द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद भगवान को तुलसी पत्तों सहित भोग लगाकर व्रत पारण करें।
- अपनी सामर्थ्य अनुसार दान देना अत्यंत फलदायी माना गया है।
🌺 पितरों के लिए खास
इस दिन केवल
- एक लोटा जल,
- कुछ काले तिल,
- और दक्षिण दिशा की ओर तर्पण
से पितरों को बैकुंठ लोक तक पहुंचाने का मार्ग खुलता है। धार्मिक ग्रंथ बताते हैं कि इस दिन किया गया तर्पण पितरों को मोक्ष प्राप्त करा देता है।
📌 निष्कर्ष
मोक्षदा एकादशी, गीता जयंती और दिव्य तिथियों के इस संगम में व्रत, पूजा, पाठ और पितृ तर्पण अत्यंत कल्याणकारी माने गए हैं। नियमपूर्वक किए गए कर्म हमारे जीवन में सुख, शांति और दिव्य कृपा के मार्ग खोलते हैं।
हरे कृष्णा — ओम नमो भगवते वासुदेवाय
