Kartik Purnima 2025 शास्त्र कहते हैं, सभी पूर्णिमाओं में सबसे श्रेष्ठ कार्तिक की पूर्णिमा है।यह वह क्षण है जब देवता स्वर्ग लोक छोड़कर गंगा तट पर आते हैं,कार्तिक पूर्णिमा: सभी पूर्णिमाओं में सबसे श्रेष्ठ
Kartik Purnima 2025 शास्त्र कहते हैं, सभी पूर्णिमाओं में सबसे श्रेष्ठ कार्तिक की पूर्णिमा है।यह वह क्षण है जब देवता स्वर्ग लोक छोड़कर गंगा तट पर आते हैं
Kartik Purnima 2025
Kartik Purnima 2025 हर हर महादेव!दोस्तों, क्या आपने कभी सोचा है…एक ऐसा दिन जब धरती पर स्वर्ग उतर आता है, जब नदियों का जल अमृत बन जाता है,जब हर दीपक का प्रकाश सीधे देवताओं तक पहुँचता है —वह दिन कोई साधारण दिन नहीं होता…वह होता है — कार्तिक पूर्णिमा
शास्त्र कहते हैं, सभी पूर्णिमाओं में सबसे श्रेष्ठ कार्तिक की पूर्णिमा है।
यह वह क्षण है जब देवता स्वर्ग लोक छोड़कर गंगा तट पर आते हैं,
और स्वयं दीपदान करते हैं।
कल्पना कीजिए दोस्तों — गंगा की लहरों पर तैरते असंख्य दीप,
आकाश में चंद्रमा की पूर्ण कलाएं, और हवाओं में बहती गंगा आरती की ध्वनि…
ऐसा लगता है जैसे खुद भगवान विष्णु और भगवान शिव एक साथ विराजमान हों।
Kartik Purnima 2025
लेकिन क्या आप जानते हैं —
यह दिन सिर्फ पूजा या स्नान का नहीं, बल्कि भाग्य परिवर्तन का दिवस है।
जो व्यक्ति कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान, दान, और दीपदान करता है,
उसे सहस्रों जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है।
यह वही तिथि है जब भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया,
और जब भगवान विष्णु ने अपना पहला अवतार — मत्स्य रूप में धारण किया था।
यही कारण है कि जल में भगवान का वास कहा गया है,
और इसी वजह से कार्तिक स्नान का इतना महत्व है।
अगर आप इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर गंगा या किसी नदी में स्नान करते हैं,
तो केवल आपका शरीर ही नहीं, आपकी आत्मा भी शुद्ध हो जाती है।
कहा जाता है —
“जिसने कार्तिक पूर्णिमा की भोर में दीपदान किया,
वह आने वाले वर्षभर अंधकार से मुक्त रहता है।”
और दोस्तों, इस बार की कार्तिक पूर्णिमा और भी खास है,
क्योंकि यह पड़ रही है कृतिका नक्षत्र में,
जिससे इसका नाम पड़ा है — महानिक पूर्णिमा,
अर्थात् महान, शक्तिशाली, और कल्याणकारी पूर्णिमा।
इस दिन का हर क्षण शुभ है —
चाहे आप भगवान विष्णु की पूजा करें,
या महादेव की आराधना,
चाहे आप तुलसी के पास दीपक जलाएँ,
या गंगा किनारे आरती करें,
हर कर्म आपको परम पुण्य प्रदान करता है।
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लेकिन सबसे बड़ा रहस्य तो यह है —
जो दीपक आप इस दिन जलाते हैं,
वह सिर्फ घी या तेल से नहीं,
बल्कि आपकी आस्था और विश्वास से जलता है।
और यही दीपक आपके घर, आपके जीवन और आपकी आत्मा में प्रकाश भर देता है।
तो दोस्तों,
इस साल 5 नवंबर 2025, जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से दमकेगा,
जब गंगा की लहरें देवताओं के स्पर्श से पवित्र होंगी,
उस क्षण आप भी एक दीप जलाइए —
क्योंकि हो सकता है उस प्रकाश में खुद भगवान विष्णु आपकी ओर देख रहे हों,
और कह रहे हों —
“वत्स, तेरा दीप मैंने स्वीकार किया।”
हर हर महादेव! 🌺
जय श्रीहरि! 🙏
शास्त्र कहते हैं, सभी पूर्णिमाओं में सबसे श्रेष्ठ कार्तिक की पूर्णिमा है।
यह वह क्षण है जब देवता स्वर्ग लोक छोड़कर गंगा तट पर आते हैं,
नमस्कार दोस्तों! आज हम बात करने जा रहे हैं कार्तिक पूर्णिमा की—वह पवित्र तिथि, जिसे शास्त्रों में सभी पूर्णिमाओं में सबसे श्रेष्ठ बताया गया है।
कार्तिक मास का महत्व यूँ तो पूरा महीना बना रहता है, लेकिन इसका समापन दिवस—पूर्णिमा तिथि, अत्यंत शुभ और पुण्यकारी मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में भगवान विष्णु का वास जल में होता है। इसीलिए इस पूरे महीने नदी, तालाब या सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है।
🪔 क्यों है कार्तिक पूर्णिमा इतनी विशेष?
शास्त्रों में उल्लेख है कि जो व्यक्ति कार्तिक मास में दीपदान करता है, उसे सहस्रों गोदान के समान पुण्य प्राप्त होता है।
वहीं नदी स्नान करने वाला व्यक्ति ब्रह्महत्या जैसे पापों से भी मुक्त हो जाता है।
श्री नारद पुराण में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति जीवन के दुख-सागर में फँस गया हो और मार्ग न मिल रहा हो, तो कार्तिक स्नान और दीपदान करके वह सभी बंधनों से मुक्त हो सकता है।
इसलिए इस तिथि को “मुक्तिदायक पूर्णिमा” भी कहा जाता है।
🌸 देव दीपावली: जब देवता उतरते हैं धरती पर
Kartik Purnima 2025
मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्वर्ग के देवता स्वयं धरती पर आते हैं।
इसी कारण यह दिन देव दीपावली के नाम से प्रसिद्ध है।
इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र जलाशय के तट पर दीपदान करना अत्यंत शुभ माना गया है।
कहा जाता है कि जैसे मनुष्य दीपावली मनाते हैं, वैसे ही देवता कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में मनाते हैं।
वाराणसी, प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन जैसे तीर्थों में इस दिन दीपों की जगमगाहट देखते ही बनती है।
शास्त्र कहते हैं, सभी पूर्णिमाओं में सबसे श्रेष्ठ कार्तिक की पूर्णिमा है।
यह वह क्षण है जब देवता स्वर्ग लोक छोड़कर गंगा तट पर आते हैं,
📅 कार्तिक पूर्णिमा 2025 की तिथि और मुहूर्त
इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा 5 नवंबर 2025, बुधवार को मनाई जाएगी।
- 🌕 पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 4 नवंबर रात 10:36 बजे
- 🌕 पूर्णिमा तिथि समाप्त: 5 नवंबर शाम 6:48 बजे
उदया तिथि के अनुसार, व्रत, स्नान और दान 5 नवंबर को ही किए जाएंगे।
🕉️ कार्तिक स्नान का शुभ मुहूर्त
- स्नान मुहूर्त: प्रातः 4:52 बजे से 5:44 बजे तक
इस अवधि में गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
यदि नदी दूर हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करने का भी वही फल बताया गया है।
📖 पूजन और कथा का शुभ समय
- भगवान विष्णु पूजा व सत्यनारायण कथा का मुहूर्त:
प्रातः 7:58 बजे से 9:20 बजे तक
इस मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा, तुलसी पूजन और सत्यनारायण कथा करना अत्यंत शुभ माना गया है।
🪔 दीपदान का महत्व और शुभ समय
दीपदान कार्तिक पूर्णिमा की आत्मा है।
शास्त्रों में कहा गया है कि प्रदोष काल में दीपदान करने से लक्ष्मी-नारायण की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- दीपदान का प्रदोषकाल मुहूर्त: शाम 5:15 से रात 7:05 तक
इस समय घर के द्वार, मंदिर, तुलसी के पास, पीपल वृक्ष के नीचे या किसी नदी के तट पर दीपदान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।
🌿 कैसे करें दीपदान अगर पूरे महीने नहीं कर पाए?
यदि आप पूरे कार्तिक मास में दीपदान नहीं कर पाए हैं, तो घबराइए मत।
आप आज के दिन 365 बातियों का दीपक जला सकते हैं।
इसे बनाने का तरीका बहुत सरल है –
थोड़ा कड़ा आटा गूंथकर एक बड़ा दीपक बनाइए, उसमें घी डालिए और 365 बातियां लगाइए।
इसे तुलसी के पास, पीपल वृक्ष के नीचे या मंदिर में जलाइए।
यह एक दीपक पूरे वर्ष के दीपदान के समान फल देता है।
🍚 दान और ब्राह्मण भोज का महत्व
कार्तिक स्नान की पूर्णता ब्राह्मण भोज और दान से होती है।
यदि ब्राह्मण भोज संभव न हो, तो कच्चा अन्न दान अवश्य करें।
चावल, आटा, तेल, घी, नमक जैसी वस्तुएं अपनी सामर्थ्य अनुसार मंदिर या ब्राह्मण को दान करें।
यह कर्म कार्तिक स्नान का पूर्ण फल प्रदान करता है।
🕉️ विशेष पौराणिक प्रसंग
इस दिन को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का वध किया था।
वहीं अन्य कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने इसी दिन अपना पहला मत्स्य अवतार लिया था।
इसलिए जल का महत्व इस दिन और अधिक बढ़ जाता है।
🌼 दिवाली छूट गई हो तो आज करें
जो लोग किसी कारणवश दिवाली नहीं मना पाए, उनके लिए कार्तिक पूर्णिमा एक अवसर पुनः देने वाली तिथि है।
आप इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा, नई मूर्ति की स्थापना या दीपोत्सव मना सकते हैं।
🙏 निष्कर्ष
दोस्तों, कार्तिक पूर्णिमा न केवल विष्णु और शिव दोनों की आराधना का दिन है, बल्कि यह आत्मशुद्धि और पुण्य संचय का भी पर्व है।
जल, दीप, दान और भक्ति — यही चार तत्व इस दिन को पवित्र बनाते हैं।
तो इस बार 5 नवंबर को जागिए भोर से पहले, कीजिए स्नान, दीपदान, कथा, और पूरे मन से उच्चारित कीजिए —
🌺 “हर हर महादेव! जय श्रीहरि!” 🌺
📌 विशेष बातें एक नजर में
| क्र. | कर्म | शुभ मुहूर्त | महत्व |
|---|---|---|---|
| 1 | स्नान | प्रातः 4:52 – 5:44 | पापों से मुक्ति |
| 2 | विष्णु पूजा व कथा | प्रातः 7:58 – 9:20 | सत्यनारायण कथा का शुभ समय |
| 3 | दीपदान | संध्या 5:15 – 7:05 | देव दीपावली, लक्ष्मी कृपा |
| 4 | अन्नदान | दिनभर | कार्तिक स्नान की पूर्णता |
| 5 | ब्राह्मण भोज | संभव हो तो दिन में | स्नान व्रत का समापन |
हर हर महादेव! जय श्रीहरि!
कार्तिक पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं!
