देवउठनी एकादशी 2025: तुलसी पर बांध दें ये एक चीज़, श्री हरि मां लक्ष्मी होगी..

🌿 देवउठनी एकादशी 2025: तुलसी पर बांध दें ये एक चीज़, श्री हरि और मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न, दरिद्रता होगी समाप्त 🌸

नई दिल्ली। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पड़ने वाली देवउठनी एकादशी, जिसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पवित्र मानी गई है। इस वर्ष यह तिथि 2 नवंबर 2025, रविवार को मनाई जाएगी।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, और उनके जागने के साथ ही समस्त देवताओं के कार्य पुनः प्रारंभ होते हैं।इसी दिन से विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण, मुंडन, जनेऊ जैसे शुभ कार्यों** का आरंभ होता है।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस दिन किया गया एक छोटा-सा तुलसी उपाय आपके जीवन की दरिद्रता, अशुभता और आर्थिक बाधाओं को दूर कर सकता है

🌿 तुलसी पर बांधें ये एक चीज़, श्री हरि होंगे प्रसन्न

देवउठनी एकादशी की प्रातःकाल स्नान कर, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और तुलसी माता के पौधे के सामने पूर्व दिशा की ओर बैठें।
फिर एक लाल या पीले रंग का पवित्र सूती धागा*लें। इस धागे में एक छोटा-सा चांदी का सिक्का और पांच पीपल के पत्ते बांधें।
अब इस धागे को तुलसी के पौधे पर चढ़ाते हुए श्रद्धा से कहें —

“हे तुलसी माता, हे श्री हरि विष्णु, कृपया मेरे घर में सदा समृद्धि और सुख का वास बनाए रखें।”

इसके बाद तुलसी माता को दूध, गंगाजल और केसर मिश्रित जल से स्नान कराएं। फिर दीपक जलाकर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः”का 11 बार जप करें।

ऐसा माना गया है कि जब श्रीहरि विष्णु देवउठनी एकादशी के दिन अपनी योगनिद्रा से जागते हैं, तो सबसे पहले तुलसी से ही वार्तालाप करते हैं। इसी कारण तुलसी पर किया गया यह छोटा-सा उपाय सीधे भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी दोनों को प्रसन्न करता है।

🌸 तुलसी क्यों हैं इतनी विशेष?

हिंदू शास्त्रों में तुलसी को केवल एक पौधा नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी का ही स्वरूप माना गया है।
कथा के अनुसार, एक समय लक्ष्मी जी ने भगवान विष्णु से पृथ्वी पर जन्म लेने की अनुमति मांगी, तब विष्णु ने कहा — “हे देवी, तुम तुलसी रूप में पृथ्वी पर अवतरित होओगी, और मेरे बिना तुम्हारी पूजा अधूरी मानी जाएगी।”

इसीलिए हर पूजा में तुलसी पत्र का उपयोग अनिवार्य माना गया है, क्योंकि इसके बिना भगवान विष्णु प्रसन्न नहीं होते।
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी का विवाह शालिग्राम (विष्णु का शिला रूप) से किया जाता है, जिसे तुलसी विवाह कहा जाता है। यह विवाह दरिद्रता को नष्ट करने वाला और घर में स्थायी सुख-समृद्धि लाने वाला माना गया है।

💫 इस उपाय से होंगे चमत्कारी परिणाम

📿 जो व्यक्ति देवउठनी एकादशी के दिन यह उपाय करता है,

  • उसके घर में धन की स्थिरता बनी रहती है।
  • कर्ज़, गरीबी और आर्थिक परेशानियाँ धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं।
  • घर के वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • परिवार में सुख, शांति और सौहार्द बढ़ता है।
  • मां लक्ष्मी की कृपा से व्यापार और करियर में उन्नति मिलती है।
  • 🪔 क्या करें और क्या न करें

✅ इस दिन प्रातः सूर्योदय से पहले स्नान करें और उपवास रखें।
✅ तुलसी पर गंगाजल, दूध, हल्दी और चंदन चढ़ाएं।
✅ शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाएं, दीपक में तिल का तेल या गाय का घी प्रयोग करें।
✅ भगवान विष्णु और तुलसी माता के विवाह में सहभागी बनें या घर में तुलसी विवाह करें।

❌ इस दिन मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन का सेवन वर्जित है।
❌ तुलसी पत्र को रविवार या द्वादशी तिथि को नहीं तोड़ना चाहिए।
❌ तुलसी के पौधे को कभी काटें नहीं, केवल छूकर प्रणाम करें।


🌼 तुलसी विवाह का आध्यात्मिक रहस्य

तुलसी विवाह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि दैवीय मिलन का प्रतीक है। यह दिन धन, वैभव और पारिवारिक समृद्धि के साथ आध्यात्मिक शुद्धता का प्रतीक माना गया है।
इस दिन तुलसी माता और श्रीहरि विष्णु का मिलन, संसार में “धर्म और समृद्धि के संगम” का प्रतीक है।
जो भी इस विवाह का साक्षी बनता है या घर में इसे संपन्न कराता है, उसके घर में कभी दरिद्रता प्रवेश नहीं करती।

देवउठनी एकादशी का दिन हर व्यक्ति के लिए भाग्य परिवर्तन का अवसर लेकर आता है।
यदि आप चाहते हैं कि आपके जीवन से कर्ज, अशुभता और दरिद्रता का अंत हो, तो इस दिन तुलसी माता की पूजा कर, लाल या पीले धागे में चांदी का सिक्का बांधकर तुलसी पर अर्पित करें।
यह एक छोटा-सा उपाय आपके जीवन में धन, सौभाग्य और विष्णु-लक्ष्मी की कृपा का स्थायी द्वार खोल देता है।

📿 याद रखें — जब तुलसी प्रसन्न होती हैं, तो श्री हरि स्वयं आपके घर निवास करते हैं। और जहाँ हरि-लक्ष्मी का वास होता है, वहाँ दरिद्रता कभी टिक नहीं सकती।

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