Onkareshwar Jyotirling:माता पार्वती के साथ आधी रात को चौसर खेलने आते हैं भगवान भोलेनाथ,ऐसी है इस ज्योर्तिलिंग की महिमा
महादेव के भारत में भगवान शिव के पवित्र 12 ज्योतिर्लिंग है माना जाता है, कि जो भी व्यक्ति इन 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करता है! उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है! और सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है! ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग इन १२ ज्योतिर्लिंगों में 4 स्थान में आता है! यहां भक्तों को भगवान शिव के चमत्कारिक दर्शन होते हैं!

Omkareshwar Jyotirlinga ओंकारेश्वर महादेव प्रदेश राज्य के खंडवा जिले में स्थित नर्मदा नदी के बीच मांधाता नाम के द्वीप पर स्थित है! यह १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है, और भगवान शिव के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है! यह ज्योतिर्लिंग नर्मदा नदी के किनारे ओम के आकार वाले दीप पर स्थित है, इसलिए ही इस मंदिर का नाम ओंकारेश्वर पड़ा है!
इस मंदिर का उल्लेख हिंदू धर्म के अनेक प्राचीन ग्रंथो जैसे कि स्कंद पुराण, विष्णु पुराण और महाभारत में भी मिलता है! यहां पर भगवान शिव को ओमकारेश्वर और ममलेश्वर दोनों रूपों में पूजा जाता है !
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर के विशेष मान्यताएं ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर बहुत सी अन्य प्राचीन मान्यताएं प्रचलित हैं, इनमें से सबसे प्रमुख मान्यता यह है कि भगवान शिव रात के समय ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में निवास करते हैं! वह यहां आकर रात में विश्राम करते हैं! इसलिए रात में यहां भगवान शिव के लिए बिस्तर लगाया जाता है!
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर एक अन्य मान्यता यह भी है इस मंदिर में भगवान शिव एवं माता पार्वती के साथ बैठकर चौसर या चौपड़ खेलते हैं! इसलिए रात्रि के समय यहां पर चौपड़ बिछाई जाती है!और गर्भ ग्रह के दरवाजे को बंद कर दिया जाता है !
सबसे आश्चर्य की बात यह है कि मंदिर के भीतर रात के समय कोई भी नहीं आ जा सकता, फिर भी यहां सुबह चौसर और उसके पासे इस तरह बिखरे हुए मिलते हैं! जैसे रात्रि के समय किसी ने यहां पर बैठ करके चौपड़ खेला हो, बहुत बड़ी चमत्कारिक बात है!
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर एक खास मान्यता यह है कि ओंकारेश्वर मंदिर में जल चढ़ाये बिना साधक की सभी तीर्थ यात्राएं अधूरी मानी जाती है !।

पौराणिक कथा ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना की ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना को लेकर कुछ पौराणिक कथाएं भी हैं, जिनमें से सबसे खास राजा मांधाता से जुड़ी हुई कथा है! इस पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में राजा मांधाता बहुत बड़े धार्मिक और शक्तिशाली राजा थे! वह भगवान शिव के परम भक्त थे,एक बार उन्होंने भगवान शिव को प्रसन्न करने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए ओमकार पर्वत पर स्थित नर्मदा का नदी के किनारे कठोर तपस्या प्रारंभ की! उनकी तपस्या इतनी प्रबल और कठिन थी, कि उनका प्रभाव संपूर्ण ब्रह्मांड पर पढ़ने लगा! उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने साक्षात उन्हें दर्शन दिया! और उनसे दो वरदान मांगने को कहा!
राजा मांधाता ने पहले वरदान में मांगा भगवान शिव से इस पवित्र स्थान पर सदैव विराजमान रहकर अपने सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने को कहा!और साथ में उन्होंने अपना दूसरा वरदान यह मांगा कि इस पवित्र स्थान के नाम के साथ मेरा नाम भी हमेशा के लिए आपसे जुडा रहे!
ताकि लोग मुझे हमेशा याद रखें, और उस स्थान पर महादेव ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए! इसलिए ही विशेष रूप से माना जाता है! कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग स्वयं भू है!यानी इसका निर्माण किसी मनुष्य नहीं करवाया है!बल्कि यह स्वयं प्रकट हुआ है! तब से भगवान शिव ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में इस स्थान पर हमेशा विराजमान है!और इस क्षेत्र को मांधाता के नाम से भी जाना जाता है!
ओंकारेश्वर मंदिर का धार्मिक महत्व हिंदू धर्म में ओंकारेश्वर मंदिर का अत्यधिक धार्मिक महत्व बताया गया है! माना जाता है कि ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान शिव की पूजा करने और नर्मदा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं!और व्यक्ति को विशेष प्रकार से मोक्ष की प्राप्ति होती है! इस पवित्र स्थल पर ध्यान और पूजा करने से मन को शांति और आध्यात्मिक फल मिलता है! यहां स्थान ध्यान और साधना के लिए बहुत ही शानदार स्थान है माना जाता है !
ओंकारेश्वर मंदिर ज्योतिर्लिंग से दिव्य ऊर्जा का संचार होता रहता है! यहां की सकारात्मक ऊर्जा से व्यक्ति के जीवन में सुख शांति एवं सुख समृद्धि का हमेशा आगमन होता है! और सभी भक्तों की विशेष रूप से कैसे भी मनोकामनाएं हो महादेव उन सभी मनोकामनाओं को अवश्य पूर्ण करते हैं!
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